Shabar Mantra Sarvasva By Sri Yogeshwaranand Ji शाबर मंत्र सर्वस्व

Shabar Mantra Sarvasva शाबर मंत्र सर्वस्व

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इस जगत् का मूल कारण ‘शब्द’ है। यह तथ्य ‘स्फोटवाद’ से स्पष्ट हो जाता है। ‘शब्द’ को ब्रह्म भी कहा गया है। यह तथ्य पूर्णतः प्रमाणित है कि प्रत्येक शब्द से उत्पन्न ध्वनि से कम्पन उत्पन्न होता है और प्रत्येक कम्पन एक रूप व्यक्त करता है। विज्ञान बहुत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि इस सृष्टि के सभी पदार्थों के बनने-बिगड़ने ( उत्पत्ति और विनाश ) का कारण कम्पन ही है। मन्त्र चूंकि शब्दों का एक समूह है, इसलिए मन्त्रों की शक्ति का महत्व सहज ही समझा जा सकता है। हमारे महर्षियों और विज्ञान अन्वेषकों ने इस तथ्य को बहुत अच्छे से जान लिया था और परिणामस्वरूप उन्होंने ऐसे शब्दों का चयन करके उन्हें इस प्रकार संयोजित किया कि उन शब्दों (मन्त्रों से, शब्दों के समूह से ) को विधि के अनुसार प्रयोग करने से जपकर्ता को उसके अभीष्ट की प्राप्ति हो सके। बहुत अन्वेषण के उपरान्त उन्होंने स्वयं द्वारा प्रतिपादित मन्त्रों के प्रयोगों की विधियों का भी सृजन किया। लेकिन वेदोक्त मन्त्रों में सावधानी और पूर्ण विधि-विधान का ज्ञान होना अति आवश्यक है अन्यथा उनका विपरीत परिणाम भी देखने को मिल सकता है। जबकि ‘शाबर’ मन्त्रों के उच्चारण मात्र से ही उनका प्रभाव प्रकट होने लगता है। उन्हें ऊर्जावान और जाग्रत बनाये रखने के लिए केवल थोड़ी सी प्रक्रिया अपनानी पड़ती है।

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