Baglamukhi Shabar Mantra ( बगलामुखी शाबर मंत्र )

Baglamukhi Shabar Mantra ( बगलामुखी शाबर मंत्र )

इस परिशिष्ट में जिन मन्त्रों का उल्लेख किया जा रहा है, वे लोक- परम्परा से सम्बद्ध भगवती-उपासकों द्वारा पुनः-पुनः सराहे गए हैं। इन मन्त्रों का प्रभाव असंदिग्ध है, जबकि इनके साधन में औपचारिकताएं नाम मात्र की हैं। यदि भगवती बगलाम्बा के प्रति पूर्ण आस्था एवं श्रद्धा-भाव रखते हुए इन मन्त्रों की साधना की जाए, तो कोई कारण नहीं है कि साधक को उसके अभीष्ट की प्राप्ति न हो।

बगलामुखी साधना से सम्बंधित अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए हमें संपर्क करें – 9917325788 ( श्री योगेश्वरानंद जी ) , 9540674788 ( सुमित गिरधरवाल )  ईमेल – [email protected]

यहाँ पर उल्लिखित शाबर मन्त्र के सम्बन्ध में अनुभवी साधकों का यह निष्कर्ष है कि यह परमशक्तिशाली मन्त्र है और इसका प्रयोग कभी निष्फल नहीं होता है। इसका सिद्धि-विधान भी अत्यन्त ही सरल है। इसके लिए साधक को यह निर्देश है कि भगवती बगला की सम्यक् उपासना एवं उपचार के उपरान्त प्रतिदिन दो माला जप एक महीने तक करें। इतने अल्प समय और अल्प परिश्रम से ही यह मन्त्र अपना प्रभाव प्रकट करने लगता है।

  बगलामुखी शाबर मंत्र –  1

ॐ मलयाचल बगला भगवती महाक्रूरी महाकराली राजमुख बन्धनं ग्राममुख बन्धनं ग्रामपुरुष बन्धनं कालमुख बन्धनं चौरमुख बन्धनं व्याघ्रमुख बन्धनं सर्वदुष्ट ग्रह बन्धनं सर्वजन बन्धनं वशीकुरु हुं फट् स्वाहा। 

( Baglamukhi Shabar Mantra in English- 1)

oṃ malayācala bagalā bhagavatī mahākrūrī mahākarālī rājamukha bandhanaṃ grāmamukha bandhanaṃ grāmapuruṣa bandhanaṃ kālamukha bandhanaṃ cauramukha bandhanaṃ vyāghramukha bandhanaṃ sarvaduṣṭa graha bandhanaṃ sarvajana bandhanaṃ vaśīkuru huṃ phaṭ svāhā।

बगलामुखी शाबर मंत्र – 2

ॐ सौ सौ सुता समुन्दर टापू, टापू में थापा, सिंहासन पीला, सिंहासन पीले ऊपर कौन बैसे? सिंहासन पीला ऊपर बगलामुखी बैसे। बगलामुखी के कौन संगी, कौन साथी? कच्ची बच्ची काक कुतिआ स्वान चिड़िया। ॐ बगला बाला हाथ मुदगर मार, शत्रु-हृदय पर स्वार, तिसकी जिह्ना खिच्चै। बगलामुखी मरणी-करणी, उच्चाटन धरणी , अनन्त कोटि सिद्धों ने मानी। ॐ बगलामुखीरमे ब्रह्माणी भण्डे, चन्द्रसूर फिरे खण्डे-खण्डे, बाला बगलामुखी नमो नमस्कार।

Baglamukhi Shabar Mantra in English- 2

oṃ sau sau sutā samundara ṭāpū, ṭāpū meṃ thāpā, siṃhāsana pīlā, siṃhāsana pīle ūpara kauna baise? siṃhāsana pīlā ūpara bagalāmukhī baise। bagalāmukhī ke kauna saṃgī, kauna sāthī? kaccī baccī kāka kutiā svāna ciड़iyā। oṃ bagalā bālā hātha mudagara māra, śatru-hṛdaya para svāra, tisakī jihnā khiccai। bagalāmukhī maraṇī-karaṇī, uccāṭana dharaṇī , ananta koṭi siddhoṃ ne mānī। oṃ bagalāmukhīrame brahmāṇī bhaṇḍe, candrasūra phire khaṇḍe-khaṇḍe, bālā bagalāmukhī namo namaskāra।

वास्तव में शाबर-मंत्र अंचलीय-भाषाओं से सम्बद्ध होते हैं, जिनका उद्गम सिद्ध उपासकों से होता है। इन सिद्धों की साधना का प्रभाव ही उनके द्वारा कहे गए शब्दों में शक्ति जाग्रत कर देता है। इन मन्त्रों में न भाषा की शुद्धता होती है और न ही संस्कृत जैसी क्लिष्टता। बल्कि ये तो एक साधक के हृदय की भावना होती है जो उसकी अपनी अंचलीय ग्रामीण भाषा में सहज ही प्रस्फुटित होती है। इसलिए इन मन्त्रों की भाषा-शैली पर विचार करने की आवश्यकता नहीं है। यदि आवश्यकता है तो वह है इनका प्रभाव महसूस करने की।

क्रम संख्या 2 पर उल्लिखित यह मन्त्र भी अंचलीय भाषा में है, जिसे किसी सिद्ध ग्रामीण साधक द्वारा कहा गया है। इस मन्त्र की नित्य-प्रति एक माला जप एक माह तक करने से इसका प्रभाव प्रकट होने लगता है। वैसे अनुभव में यह आया है कि शाबर मन्त्रों के जप यदि होली, दीपावली की रात्रि अथवा ग्रहण काल में ही कर लिया जाए तो वह भी पर्याप्त होता है। लेकिन उत्तम यह है कि इन्हें ग्रहण काल में पर्याप्त मात्रा में जपकर एक माह तक नित्य-प्रति निर्दिष्ट संख्या में जपा जाए।

बगलामुखी शाबर मंत्र –  3

इन दो बगला-शाबर मन्त्रों के अतिरिक्त भी एक अन्य शाबर मंत्र गुरु-प्रसाद स्वरूप हमें प्राप्त हुआ था, जिसका उल्लेख मैं यहाँ कर रहा हूं। इस मन्त्र का विधान यह है कि सर्वप्रथम भगवती का पूजन करके इस मन्त्र का दस हजार की संख्या में जप करने हेतु संकल्पित होना चाहिए। तदोपरान्त एक निश्चित अवधि में जप पूर्ण करके एक हजार की संख्या में इसका हवन ‘मालकांगनी’ से करना चाहिए। तदोपरान्त तर्पण, मार्जन व ब्राह्मण भोजन कराना चाहिए। तर्पण गुड़ोदक से करें। इस प्रकार इस मन्त्र का अनुष्ठान पूर्ण होता है। फिर नित्य-प्रति एक माला इस मन्त्र की जपते रहना चाहिए। इस मन्त्र का प्रभाव भी अचूक है अतः निश्चित रूप से साधक के प्रत्येक अभीष्ट की पूर्ति होती है। मन्त्र इस प्रकार है

ॐ ह्रीं बगलामुखि! जगद्वशंकरी! मां बगले प्रसीद-प्रसीद मम सर्व मनोरथान पूरय-पूरय ह्रीं ॐ स्वाहा।

Baglamukhi Shabar Mantra in English – 3

oṃ hrīṃ bagalāmukhi! jagadvaśaṃkarī! māṃ bagale prasīda-prasīda mama sarva manorathāna pūraya-pūraya hrīṃ oṃ svāhā।

यदि आपको इन मन्त्रों का प्रभाव देखना है तो निर्देशानुसार इनका साधन कर अभीष्ट की प्राप्ति करें। ये मन्त्र किस प्रमाणिक ग्रन्थ में हैं, यह कुछ स्पष्ट नहीं है। प्रमाण केवल यही है कि ये गुरुमुख से प्राप्त हैं। शेष जब आप इनकी साधना करेंगे तो प्राप्त होने वाला परिणाम ही इनकी प्रमाणिकता का साक्षी होगा।

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बगलामुखी गायत्री मंत्र Baglamukhi Gayatri Mantra

Baglamukhi Gayatri Mantra बगलामुखी गायत्री मंत्र

बगलामुखी गायत्री मंत्र के विषय में कहा गया है कि बगला-गायत्री मंत्र , बगलामुखी के जितने भी  मंत्र हैं, उन सबका प्राण है।बगला-गायत्री का जप किए बिना यदि साधक बगला के अन्य किसी भी मंत्र का चाहे लाखों-करोड़ों की संख्या में जप कर ले तो भी वह मंत्र अपना फल नहीं देता अर्थात् सिद्ध नहीं होता है। इसलिए आवश्यक है कि यदि बगला के किसी भी मंत्र को सिद्ध करना है, उसका फल प्राप्त करना है तो बगला-गायत्री का भी जप किया जाए।

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इसके लिए विधान है कि यदि आप भगवती बगलामुखी के किसी भी मंत्र का पुरश्चरण कर रहे हों तो कम से कम उसका दशांश बगलामुखी गायत्री मंत्र का जप अवश्य करें। इसी प्रकार यदि बगलामुखी के किसी भी मंत्र का प्रयोग कर रहे हों तो उसका 1/10 भाग बगलामुखी गायत्री का जप अवश्य करें क्योंकि बगला-गायत्री बगला-महामंत्र का जीवन है।
यह भी स्मरण रखें कि बगला-गायत्री से सम्बन्धित किसी भी साधना अथवा प्रयोग में जहां मंत्र -जप की संख्या निर्धारित ना हो वहां जप-संख्या एक लाख समझना चाहिए। इसी प्रकार जहां दिनों की संख्या का उल्लेख ना हो वहां 15 दिन प्रयोग-काल मानना चाहिए। जैसा कि सांख्यायन तंत्र में भी उल्लेख आया है –

पुरश्चरण – काले तु, गायत्री प्रजपेन्नरः।

मूल विद्या दशांशं च ,  मंत्र   सिद्धिर्भवेद् ध्रुवम् ।। 

त्यक्त्वा तां मंत्र   गायत्री , यो जपेन्मन्त्रमादरात्।

कोटि-कोटि जपेनापि, तस्य सिद्धिर्न जायते।।

जप-संख्या यत्र नोक्ता, लक्षमेकं कुमारक!।

दिन – संख्या यत्र नोक्ता, पक्षमेकं न संशयः।।

गायत्री बगलानाम्नी, बगलायाश्च जीवनम्।

मन्त्रादौ चाथ मन्त्रान्ते, जपेद् ध्यान-पुरस्सरम्।।

उपर्युक्त कारणों के आधार पर ही श्री बगला-गायत्री का उल्लेख यहां किया जा रहा है।

1. ॐ ह्ल्रीं ब्रह्मास्त्राय विद्महे स्तम्भन बाणाय धीमहि तन्नो बगला प्रचोदयात्।
2. ॐ  ऐं बगलामुखी विद्महे,  ॐ  क्लीं कान्तेश्वरी धीमहि ॐ  सौः तन्नः प्रह्लीं प्रचोदयात्।।  (बाला मन्त्र सम्पुटित)

बगलामुखी गायत्री मंत्र जप विधान

ॐ ह्ल्रीं ब्रह्मास्त्राय विद्महे स्तम्भन बाणाय धीमहि तन्नो बगला प्रचोदयात्।

विनियोग: – अस्य श्री बगलागायत्रीमंत्रस्य ब्रह्मा ट्टषिः, गायत्री छन्दः, चिन्मयी शक्तिरूपिणी ब्रह्मास्त्र बगला देवता, ॐ बीजं, ह्रीं शक्तिः, विद्महे कीलकं, श्री बगलामुखी देवता प्रीतये जपे विनियोगः।

ॠष्यादि न्यास:
ॐ  श्री ब्रह्मर्षये नमः शिरसि।
गायत्री छन्दसे नमः मुखे।
ब्रह्मास्त्र बगला देवतायै नमः हृदये।
ॐ बीजाय नमः गुह्ये।
ह्रीं शक्तये नमः पादयोः।
विद्महे कीलकाय नमः सर्वांगे।

कर-न्यास:
ॐ  ह्ल्रीं ब्रह्मास्त्राय विद्महे अंगुष्ठाभ्यां नमः।
स्तम्भन बाणाय धीमहि तर्जनीभ्यां स्वाहा ।
तन्नो बगला प्रचोदयात् मध्यमाभ्यां वषट्।
ॐ ह्ल्रीं ब्रह्मास्त्राय विद्महे अनामिकाभ्यां हुं।
स्तम्भन बाणाय धीमहि कनिष्ठिकाभ्यां वौषट्।
तन्नो बगला प्रचोदयात् करतलकरपृष्ठाभ्यां फट्।

षडंग-न्यास:
ॐ ह्ल्रीं ब्रह्मास्त्राय विद्महे हृदयाय नमः।
स्तम्भन बाणाय धीमहि शिरसे स्वाहा।
तन्नो बगला प्रचोदयात् शिखायै वषट्।
ॐ ह्ल्रीं ब्रह्मास्त्राय विद्महे कवचाय हुं।
स्तम्भन बाणाय धीमहि नेत्रत्रयाय वौषट्।
तन्नो बगला प्रचोदयात् अस्त्राय फट्।

इसके उपरान्त जप करें। गायत्री-जप करने के उपरान्त यदि मूल- मंत्र अथवा अन्य किसी मंत्र का जप करना हो तो उसी मंत्र के ध्यान व न्यास आदि करने चाहिए। बगला-गायत्री का ध्यान मूल-मंत्र के अनुसार ही करें।
अब बगला-गायत्री मंत्र के प्रयोगों के विषय में स्पष्ट कर रहा हूं।

प्रयोग

मोक्षार्थ: ‘ॐ ’ सहित जप करें।
कामार्थ: ‘ॐ ग्लौं’ सहित जप करें।
उच्चाटनार्थ: ‘ग्लौं’ सहित जप करें।
सम्मोहनार्थ: ‘क्लीं’ सहित जप करें।
स्तम्भनार्थ: ‘ह्ल्रीं’ सहित जप करें।
भूत-प्रेत-पिशाचादि से निवृत्ति: ‘ह्रीं ’ सहित जप करें।
ज्वर महाताप की शान्ति: ‘वं’ सहित जप करें।
राजा-वशीकरण तथा इष्ट-सिद्धि :  ‘ह्रीं’ सहित जप करें।

विद्वेषणार्थ: ‘धूं-धूं’ सहित जप करें।
मारणार्थ: ‘हूं ग्लौं ह्रीं’ सहित जप करें।
विद्यार्थ: ‘ऐं’ सहित जप करें।
सुयोग्य कन्यार्थ: ‘ऐं क्लीं सौः’ सहित जप करें।
धनार्थ : ‘श्री’ सहित जप करें।
विष-नाशार्थ: ‘क्षिप’ सहित जप करें।
प्रेतबाध-नाशार्थ: ‘हं’ सहित जप करें।
रोग-नाशार्थ: ‘ॐ जूं सः’ सहित जप करें।

उपरोक्त सभी बीजों को बगला-गायत्री मन्त्र के आदि (आरम्भ) में लगाकर जप करने से निर्दिष्ट फल की प्राप्ति होती है।

बीज सम्पुटीकरण विधान

भूमि-प्राप्ति के लिए ”स्तम्भन बाणाय“ के बाद ”ग्लौं“ बीज लगाकर जप करें। शत्रु को ताप व मृत्यु प्रदान करने के लिए मन्त्र के आरम्भ में ‘रं’ लगाकर जप करें।
राज-वशीकरण के लिए मन्त्र के आदि में ‘ह्रीं’ लगाकर जप करना चाहिए।
इन सभी मन्त्रों का जप कामनानुसार चयन करके करना चाहिए। जप-संख्या कम से कम एक लाख होनी आवश्यक है।

स्मरण रखें! कलिकाल में गायत्री -जप के बिना कोई भी मन्त्र सिद्ध हो ही नहीं सकता, यथा

गायत्री च बिना मन्त्रो न सिद्धयति कलौ युगे

यदि करोड़ों मन्त्रों का जप कर लिया हो और गायत्री-जप (बगला- गायत्री ) नहीं किया, तो साधक को कोई भी मन्त्र सिद्ध नहीं हो सकता।

उपरोक्तानुसार जप-विधान का पालन करने से बगला-गायत्री संसार में सभी सिद्धि प्रदान करती है। चार लाख जप करने से इसका पुरश्चरण होता है। जप का दशांश चालीस हजार तर्पण और तर्पण का दशांश चार हजार मन्त्रों का हवन घी से होता है। हवन का दशांश चार सौ ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है। यदि इतनी संख्या में ब्राह्मणों को भोजन कराने की सामर्थ्य न हो तो चालीस अथवा ग्यारह ब्राह्मणों को भोजन अवश्य कराएं। यही इस मन्त्र का पूर्ण विधान है।

अधिक जानकारी के लिए आप हमारी पुस्तक बगलामुखी तंत्रम एवं बगलामुखी साधना और सिद्धि का अध्यन अवश्य करें ।

यदि आप माँ बगलामुखी साधना के बारे में अधिक जानना चाहते हैं तो नीचे दिये गए लेख पढ़ें –

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Baglamukhi Jayanti 23rd April 2018 ( बगलामुखी प्रकटोत्सव 2018)

23 April 2018 (वैशाख शुक्ल अष्टमी) को देवी बगलामुखी जयंती  (अवतरण दिवस)  है। आप सभी को बगलामुखी जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।  माँ पीताम्बरा की कृपा से आप सदैव प्रसन्न रहें एवं भक्ति के मार्ग पर अग्रसर रहें यही माँ बगलामुखी से हमरी विनती है।  वैसे न तो ईश्वर का कभी जन्म होता एवं न ही मृत्यु। हाँ ये जरूर है कि ईश्वर समय समय पर अपने भक्तो की रक्षा हेतु इस संसार में समय समय पर प्रकट अवश्य होते है।  

यह दिन सभी भक्तों के लिए एक विशेष महत्व रखता है और प्रत्येक भक्त ऐसे शुभ दिन पर माँ की अधिक से अधिक कृपा प्राप्त करना चाहता है।  यहाँ आपको बताते है कि कैसे आप भी माँ की उपासना कर उन्हें प्रसन्न कर सकते है।

एक बात अवश्य ध्यान रखें कि ईश्वर के रूप में आपके माता पिता आपके घर में उपस्थित है। ईश्वर के किसी भी रूप की आप उपासना करें अथवा न करें लेकिन अपने माता पिता की यदि आपने ईश्वर मानकर उपासना कर ली तो इस संसार से तरने से आपको कोई नहीं रोक सकता। यदि आप अपने माता पिता का दिल दुखाते हैं तो ईश्वर कभी भी आपके द्वारा की गयी पूजा को स्वीकार नहीं करेंगे।  इसीलिए माँ बगलामुखी पूजा करने से पहले अपने माता पिता की सेवा करें एवं उनको जो भी पसंद हो उन्हें अर्पित एवं प्रतिदिन उनकी सेवा करें ।

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Maa Baglamukhi Aarti ( बगलामुखी आरती )

माँ बगलामुखी आरती

 ( Maa Baglamukhi Aarti in Hindi)

माँ बगलामुखी प्रसन्न करने के लिए पूजा के अंत में उनकी आरती करनी चाहिए। Here we are giving Baglamukhi Aarti in Hindi. For more information call us on 9410030994 or 9540674788. We will give you a link to Baglamukhi Aarti Mp3 Download

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Baglamukhi Aarti ( बगलामुखी आरती )

जय जयति सुखदा, सिद्धिदा, सर्वार्थ – साधक शंकरी।
स्वाहा, स्वधा, सिद्धा, शुभा, दुर्गानमो सर्वेश्वरी ।।
जय सृष्टि-स्थिति-कारिणि-संहारिणि साध्या सुखी।
शरणागतो-अहं त्राहि माम् , मां त्राहि माम् बगलामुखी।।

जय प्रकृति-पुरूषात्मक-जगत-कारण-करणि आनन्दिनी।
विद्या-अविद्या, सादि-कादि, अनादि ब्रह्म-स्वरूपिणी।।
ऐश्वर्य-आत्मा-भाव-अष्टम, अंग परमात्मा सखी।
शरणागतो-अहं त्राहि माम्, मां त्राहि माम् बगलामुखी।।

जय पंच-प्राण-प्रदा-मुदा, अज्ञान-ब्रह्म-प्रकाशिका।
संज्ञान-धृति-अज्ञान-मति-विज्ञान-शक्तिविधायिका ।।
जय सप्त-व्याहृति-रूप, ब्रह्म विभू ति शशी-मुखी ।
शरणागतो अहं त्राहि माम्, मां त्राहि माम् बगलामुखी।।

आपत्ति-अम्बुधि अगम अम्ब! अनाथ आश्रयहीन मैं।
पतवार श्वास-प्रश्वास क्षीण, सुषुप्त तन-मन दीन मैं।।
षड्-रिपु-तरंगित पंच-विष-नद, पंच-भय-भीता दुखी।
शरणागतो अहं त्राहि माम्, मां त्राहि माम् बगलामुखी।।

जय परमज्योतिर्मय शुभम् , ज्योति परा अपरा परा।
नैका, एका, अनजा, अजा, मन-वाक्-बुद्धि-अगोचरा।।
पाशांकुशा, पीतासना, पीताम्बरा, पंकजमुखी।
शरणागतो अहं त्राहि माम्, मां त्राहि माम् बगलामुखी।।

भव-ताप-रति-गति-मति-कुमति, कर्त्तव्य कानन अति घना।
अज्ञान-दावानल प्रबल संकट विकल मन अनमना।।
दुर्भाग्य-घन-हरि, पीत-पट-विदयुत झरो करूणा अमी।
शरणागतो अहं त्राहि माम्, मां त्राहि माम् बगलामुखी।।

हिय-पाप पीत-पयोधि में, प्रकटो जननि पीताम्बरा!।
तन-मन सकल व्याकुल विकल, त्रय-ताप-वायु भयंकरा।।
अन्तःकरण दश इन्द्रियां, मम देह देवि! चतुर्दशी।
शरणागतो अहं त्राहि माम्, मां त्राहि माम् बगलामुखी।।

दारिद्रय-दग्ध-क्रिया, कुटिल-श्रद्धा, प्रज्वलित वासना। वासना।
अभिमान-ग्रन्थित-भक्तिहार, विकारमय मम साधना।।
अज्ञान-ध्यान, विचार-चंचल, वृत्ति वैभव-उन्मुखी।
शरणागतो अहं त्राहि माम्, मां त्राहि माम् बगलामुखी।।

बगलामुखी साधना से सम्बंधित अधिक जानने के लिए हमारी पुस्तक बगलामुखी तंत्रम पढ़ें।

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