Baglamukhi shodashopchar Pujan बगलामुखी षोडशोपचार पूजन

Baglamukhi shodashopchar Pujan बगलामुखी षोडशोपचार पूजन

शास्त्रों में देवी-देवताओं को प्रसन्न करने हेतु उपासना-विधियों में सर्वोत्तम उपासना-विधि उनके षोडशोपचार पूजन को माना गया है। षोडशोपचार पूजन का अर्थ होता है – सोलह उपचारों से पूजन करना। सोलह उपचार निम्नवत् कहे गए हैं।
(1) आवाहन (2) आसन (3) पाद्य (4) अर्घ्य (5) स्नान (6) वस्त्र
(7) यज्ञोपवीत (सौभाग्य सूत्र) (8) गन्ध (9) पुष्प तथा पुष्पमाला (10) दीपक (11) अक्षत (चावल) (12) पान-सुपारी-लौंग (13) नैवेद्य (14) दक्षिणा (15) आरती (16) प्रदक्षिणा तथा पुष्पाञ्जलि।
इन उपचारों के अतिरिक्त पांच उपचार, दश उपचार, बारह उपचार, अट्ठारह उपचार आदि भी होते हैं। लेकिन यहां 16 उपचारों की पूजन- सामग्री एवं उनका विधान अंकित किया जा रहा है। सामग्री को पूजा से पहले अपने पास रख लेना चाहिए। यहां सामग्री में हवन की सामग्री भी लिखी गयी है। यदि केवल पूजन ही करना हो तो वांछित सामग्री का चयन साधक अपनी सुविधा तथा उपलब्धता के अनुसार करके एकत्र कर लें।

अधिक जानकारी के लिये ईमेल करें – shaktisadhna@yahoo.com अथवा कॉल करें – 9540674788, 9410030994

ध्यान-आवाहन– मन्त्रों और भाव द्वारा भगवान का ध्यान किया जाता है | आवाहन का अर्थ है पास लाना। ईष्ट देवता को अपने सम्मुख या पास लाने के लिए आवाहन किया जाता है। उनसे निवेदन किया जाता है कि वे हमारे सामने हमारे पास आए, इसमें भाव यह होता है। कि वह हमारे ईष्ट देवता की मूर्ति में वास करें, तथा हमें आत्मिक बल एवं आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करें, ताकि हम उनका आदरपूर्वक सत्कार करें। जिस प्रकार मनोवांछित मेहमान या मित्र को अपने यहां आया देखकर आनंद प्रसन्नता होती है।

सर्वप्रथम भगवती पीताम्बरा का आवाहन करें –

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो मऽआवह।।
आत्मसंस्थां प्रजां शुद्धां त्वामहं परमेश्वरीम्।
अरण्यामिव हव्याशं मूर्तिमावाहयाम्यहम्।।

”श्री पीताम्बरायै नमः आवाहनं समर्पयामि“ कहकर ‘आवाहिनी मुद्रा’ का प्रदर्शन करें।

आसन – देवी अथवा देवता को बैठने के लिए मानसिक रूप से आसन प्रदान करना।  

हाथ में छः पुष्प लेकर निम्नांकित श्लोक-पाठ करें –

तां मऽआवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्।
यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम्।।
सर्वान्तर्यामिनि देवी सर्वबीजमये शुभे।
स्वात्मस्थमपरं शुद्धमासनं कल्पयाम्हम्।।

श्री पीताम्बरायै नमः आसनं समर्पयामि“ बोलकर भगवती के समक्ष ‘स्थापिनी मुद्रा’ का प्रदर्शन करें। मानसिक रूप से उन्हें आसन दें।

सान्निध्य – 

अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम् ।
श्रियं देवीमुपहव्ये श्रीमां देवी जुषताम्।।
अनन्या तव देवशि मूर्त्तिशक्तिरियं प्रभो।
सान्निध्यं कुरु तस्यां त्वं भक्तानुग्रहतत्परे।।

”श्री पीताम्बरायै नमः। श्री पीताम्बरे इह सन्निधेहि सन्निधेहि“ बोलकर भगवती के समक्ष ‘सन्निधापिनी मुद्रा’ का प्रदर्शन करें।

पाद्य– पाद्यं सम्मान सूचक है। ऐसा भाव करना है कि भगवान के प्रकट होने पर उनके हाथ पावं धुलाकर आचमन कराकर स्नान कराते हैं |

कां सोऽस्मिता हिरण्यप्रकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम्।
पद्मे स्थितां पद्मवर्णा तामिहोपहव्ये श्रियम्।।
गंगादिसर्वतीर्थेभ्यो मया प्रार्थनयाहृतम्।
तोयमेतत्सुखस्पर्शं पाद्यार्थं प्रतिगृह्यताम्।।

”श्री पीताम्बरायै नमः पाद्यं समर्पयामि“ बोलकर भगवती को पाद्य अर्पित करें। फिर ”श्री पीताम्बरे इह सन्निरूद्धा भव सन्निरूद्धा भव“ बोलकर ‘सन्निरोधिनी मुद्रा’ का प्रदर्शन करें। (पाद्य में चन्दन, पीतपुष्प, अक्षत, पीली सरसों व गंगाजल होते हैं।)

अर्घ्य– अर्घ्य सम्मान सूचक है। ऐसा भाव करना है कि भगवान के प्रकट होने पर उनके हाथ पावं धुलाकर आचमन कराकर स्नान कराते हैं |
चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम्।
तां पद्मनेमिं शरणं प्रपद्ये अलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणोमि।।
गंध्पुष्पाक्षतैर्युक्तमर्घ्यं सम्पादितं मया।
गृहाण त्वं महादेवी! प्रसन्ना भव सर्वदा।।
”श्री पीताम्बरायै नमः अर्घ्यं समर्पयामि“ बोलकर भगवती को अर्घ्यं प्रदान करें।

आचमन– आचमन यानी मन, कर्म और वचन से शुद्धि आचमन का अर्थ है अंजलि मे जल लेकर पीना, यह शुद्धि के लिए किया जाता है। आचमन तीन बार किया जाता है। इससे मन की शुद्धि होती है।
भगवती को कर्पूर मिला जल आचमन के लिए प्रदान करें। उसमें जायफल, लौंग तथा कंकोल का चूर्ण भी मिलाएं।

आदित्य वर्णे तपसोऽअधिजातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः।
तस्या फलानि तपसा नुदन्तु या अंतरायाश्च बाह्या अलक्ष्मीः।।
कर्पूरेण सुगन्धेन वासितं स्वादु शीतलम्।
तोयमाचमनीयार्थं गृहाण परमेश्वरी।।
”श्री पीताम्बरायै नमः आचमनं समर्पयामि।“

स्नान– ईश्वर को शुद्ध जल से स्नान कराया जाता है | एक तरह से यह ईश्वर का स्वागत सत्कार होता है | गंगाजल में केसर व गोरोचन मिलाएं तथा मंत्र पढ़कर भगवती को प्रदान करें –

उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह।
प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन् कीर्तिमृद्धिं ददातु मे।।
मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम्।
तदिदं कल्पितं देवि! स्नानार्थं प्रतिग्रह्यताम्।।

”श्री बगलायै नमः स्नानं समर्पयामि।“

दुग्ध् स्नान – गाय के दूध में केसर मिलाकर भगवती को स्नानार्थ प्रदान करें –

क्षुप्तिपासामलां ज्येष्ठां अलक्ष्मीं नाशयाम्यहम्।
अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णुद मे गृहात्।।
कामधेनु समुत्पन्नं सर्वेषां जीवनं परम्।
पावनं या हेतुश्च पयः स्नानार्थमर्पितम्।।

”श्री पीताम्बराय नमः दुग्धं स्नानं समर्पयामि।“

दधि स्नान – गाय के दूध से बनी दही से भगवती को स्नान कराएं –
पयसस्तु समुद्रभूतं मधुराम्लं शशीप्रभाम्।
दध्यानीतं महोदवि! स्नानार्थं प्रतिगह्यताम्।।

”श्री पीताम्बरायै नमः दधिस्नानं समर्पयामि।“

घृत स्नान – गाय के दूध से बने घी से भगवती को स्नान कराएं –
नवनीत समुत्पन्नं सर्वसंतोषकारकम्।
घृतं तुभ्यं प्रदास्यामि स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्।।

”श्री पीताम्बरायै नमः घृत स्नानं समर्पयामि।“

मधु स्नान – शुद्ध शहद से भगवती को स्नान कराएं –
पुष्परेणु समुत्पन्नं सुस्वादुं मधुरं मधु ।
तेजः पुष्टि समायुक्तं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्।।

”श्री पीताम्बरायै नमः मधुस्नानं समर्पयामि।“

शर्करा स्नान
इक्षुसार समुद्भूतं शर्करां पुष्टिदां शुभाम्।
मलापहारिकां दिव्यां स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्।।

”श्री पीताम्बरायै नमः शर्करा स्नानं समर्पयामि।“

गंध – 

गंधद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम्।
ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम्।।
श्रीखण्डं चन्दनं दिव्यं गंधाढ्यं सुमनोहरम्।

विलेपनं च देवेशि! चन्दनं प्रतिगृह्यताम्।।
”श्री पीताम्बरायै नमः गन्धं समर्पयामि।“ (भगवती को चन्दन अर्पित करें।)

सिंदूर –

सिंदूरमरुणाभासं जपाकुसुमसन्निभम्।
पूजिताऽसि मया देवि! प्रसीद बगलामुखि!।।
”श्री पीताम्बरायै नमः सिंदूरं समर्पयामि।“

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 Baglamukhi shodashopchar Pujan बगलामुखी षोडशोपचार पूजन

 

 

 

7. वस्त्र– ईश्वर को स्नान के बाद वस्त्र चढ़ाये जाते हैं, ऐसा भाव रखा जाता है कि हम ईश्वर को अपने हाथों से वस्त्र अर्पण कर रहे हैं या पहना रहे है, यह ईश्वर की सेवा है |
8. यज्ञोपवीत– यज्ञोपवीत का अर्थ जनेऊ होता है | भगवान को समर्पित किया जाता है। यह देवी को अर्पण नहीं किया जाता है। देवी को सौभाग्य सूत्र अर्पित किया जाता है।
9. गंधाक्षत – रोली, हल्दी,चन्दन, अबीर,गुलाल, अक्षत (अखंडित चावल )

10. पुष्प – फूल माला (जिस ईश्वर का पूजन हो रहा है उसके पसंद के फूल और उसकी माला )
11. धूप – धूपबत्ती
12. दीप – दीपक (शुद्ध घी का इस्तेमाल करें )
13. नैवेद्य  – भगवान को मिष्ठान का भोग लगाया जाता है इसको ही नैवेद्य कहते हैं |
14.ताम्बूल, दक्षिणा, जल -आरती – तांबुल का मतलब पान है। यह महत्वपूर्ण पूजन सामग्री है। फल के बाद तांबुल समर्पित किया जाता है। ताम्बूल के साथ में पुंगी फल (सुपारी), लौंग और इलायची भी डाली जाती है | दक्षिणा अर्थात् द्रव्य समर्पित किया जाता है। भगवान भाव के भूखे हैं। अत: उन्हें द्रव्य से कोई लेना-देना नहीं है। द्रव्य के रूप में रुपए,स्वर्ण, चांदी कुछ की अर्पित किया जा सकता है। आरती पूजा के अंत में धूप, दीप, कपूर से की जाती है। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। आरती में एक, तीन, पांच, सात यानि विषम बत्तियों वाला दीपक प्रयोग किया जाता है। आरती चार प्रकार की होती है :– दीपआरती- जलआरती- धूप, कपूर,  पुष्प आरती
15. मंत्र पुष्पांजलि– मंत्र पुष्पांजलीमंत्रों द्वारा हाथों में फूल लेकर भगवान को पुष्प समर्पित किए जाते हैं तथा प्रार्थना की जाती है। भाव यह है कि इन पुष्पों की सुगंध की तरह हमारा यश सब दूर फैले तथा हम प्रसन्नता पूर्वक जीवन बीताएं।
16. प्रदक्षिणा-नमस्कार, स्तुति -प्रदक्षिणा का अर्थ है परिक्रमा | आरती के उपरांत भगवन की परिक्रमा की जाती है, परिक्रमा हमेशा क्लॉक वाइज (clock-wise) करनी चाहिए | स्तुति में क्षमा प्रार्थना करते हैं, क्षमा मांगने का आशय है कि हमसे कुछ भूल, गलती हो गई हो तो आप हमारे अपराध को क्षमा करें।

राजोपचार पूजन
राजोपचार पूजन में षोडशोपचार पूजन के अतिरिक्त छत्र, चमर, पादुका, रत्न व आभूषण आदि विविध सामग्रियों व सज्जा से की गयी पूजा राजोपचार पूजन कहलाती है |
राजोपचार अर्थात राजसी ठाठ-बाठ के साथ पूजन होता है, पूजन तो नियमतः ही होता है परन्तु पूजन कराने वाले के सामर्थ्य के अनुसार जितना दिव्य और राजसी सामग्रियों से सजावट और चढ़ावा होता है उसे ही राजोपचार पूजन कहते हैं |

Shodashopchar Pujan in English

āvāhana

oṃ hiraṇyavarṇāṃ hariṇīṃ suvarṇarajatasrajām।
candrāṃ hiraṇmayīṃ lakṣmīṃ jātavedo ma’āvaha।।
ātmasaṃsthāṃ prajāṃ śuddhāṃ tvāmahaṃ parameśvarīm।
araṇyāmiva havyāśaṃ mūrtimāvāhayāmyaham।।

Chant – “śrī pītāmbarāyai namaḥ āvāhanaṃ samarpayāmi” and show āvāhinī mudrā

āsana

tāṃ ma’āvaha jātavedo lakṣmīmanapagāminīm।
yasyāṃ hiraṇyaṃ vindeyaṃ gāmaśvaṃ puruṣānaham।।
sarvāntaryāmini devī sarvabījamaye śubhe।
svātmasthamaparaṃ śuddhamāsanaṃ kalpayāmham।।

 sānnidhya – 

aśvapūrvāṃ rathamadhyāṃ hastinādaprabodhinīm ।
śriyaṃ devīmupahavye śrīmāṃ devī juṣatām।।
ananyā tava devaśi mūrttiśaktiriyaṃ prabho।
sānnidhyaṃ kuru tasyāṃ tvaṃ bhaktānugrahatatpare।।

pādya

kāṃ so’smitā hiraṇyaprakārāmārdrāṃ jvalantīṃ tṛptāṃ tarpayantīm।
padme sthitāṃ padmavarṇā tāmihopahavye śriyam।।
gaṃgādisarvatīrthebhyo mayā prārthanayāhṛtam।
toyametatsukhasparśaṃ pādyārthaṃ pratigṛhyatām।।

arghya – 
candrāṃ prabhāsāṃ yaśasā jvalantīṃ śriyaṃ loke devajuṣṭāmudārām।
tāṃ padmanemiṃ śaraṇaṃ prapadye alakṣmīrme naśyatāṃ tvāṃ vṛṇomi।।
gaṃdhpuṣpākṣatairyuktamarghyaṃ sampāditaṃ mayā।
gṛhāṇa tvaṃ mahādevī! prasannā bhava sarvadā।।

ācamana – 

āditya varṇe tapaso’adhijāto vanaspatistava vṛkṣo’tha bilvaḥ।
tasyā phalāni tapasā nudantu yā aṃtarāyāśca bāhyā alakṣmīḥ।।
karpūreṇa sugandhena vāsitaṃ svādu śītalam।
toyamācamanīyārthaṃ gṛhāṇa parameśvarī।।
“śrī pītāmbarāyai namaḥ ācamanaṃ samarpayāmi।”

snāna – 
upaitu māṃ devasakhaḥ kīrtiśca maṇinā saha।
prādurbhūto’smi rāṣṭre’smin kīrtimṛddhiṃ dadātu me।।
mandākinyāstu yadvāri sarvapāpaharaṃ śubham।
tadidaṃ kalpitaṃ devi! snānārthaṃ pratigrahyatām।।

“śrī bagalāyai namaḥ snānaṃ samarpayāmi।”

siṃdūra – 

siṃdūramaruṇābhāsaṃ japākusumasannibham।
pūjitā’si mayā devi! prasīda bagalāmukhi!।।
“śrī pītāmbarāyai namaḥ siṃdūraṃ samarpayāmi।”

Benefits of Shodashopchar Pujan

Baglamukhi Shodashopchar Pujan is done to appease Ma Pitambara ( Baglamukhi ). By blessings of ma baglamukhi one can get rid of false court cases, any type of black magic, critical health issues etc.

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Devi Baglamukhi Jayanti देवी बगलामुखी जयंती

Baglamukhi Jayanti

3 May 2017 (वैशाख शुक्ल अष्टमी) को देवी बगलामुखी जयंती  (अवतरण दिवस)  है। आप सभी को बगलामुखी जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।  आप माँ पीताम्बरा की कृपा से सदैव प्रसन्न रहें एवं भक्ति के मार्ग पर अग्रसर रहें यही माँ बगलामुखी से हमरी विनती है।  जय माता दी।

यह दिन सभी भक्तों के लिए एक विशेष महत्व रखता है और प्रत्येक भक्त ऐसे शुभ दिन पर माँ की अधिक से अधिक कृपा प्राप्त करना चाहता है।  यहाँ आपको बताते है कि कैसे आप भी माँ की उपासना कर उन्हें प्रसन्न कर सकते है।

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Baglamukhi Jayanti Pooja Vidhi (बगलामुखी जयंती पूजा विधि )

बगलामुखी जयंती की यह पूजा कोई भी व्यक्ति कर सकता है चाहे वह दीक्षित है अथवा नहीं।  यह पूजा आप सुबह में अथवा रात्रि में करें।  माँ बगलामुखी का एक नाम पीताम्बरा भी है,  इन्हें पीला रंग अति प्रिय है इसलिए इनके पूजन में पीले रंग की सामग्री का उपयोग सबसे ज्यादा होता है। पीले रंग का आसन  लेकर उत्तर अथवा पूर्व दिशा की ओर मुखे करके बैठ जाएं। अपने सामने माँ बगलामुखी का चित्र अथवा यन्त्र रख लें।  यदि आपके पास यह सामग्री नहीं है तो इस पूजा को आप माँ दुर्गा के चित्र के सामने भी कर सकते हैं।

गाय के शुद्ध घी , सरसो अथवा तिल के तेल से दीपक जलाएं।  सर्वप्रथम अपने गुरुदेव का ध्यान करें एवं गुरु मंत्र का जप करें। जिनके पास गुरु मंत्र नहीं है वो “ॐ श्री गुरुवे नमः” का ११ बार जप कर सकते है।  इसके पश्चात गणेश जी का ध्यान करके “ॐ गं गणपतये नमः” का जप करें।  इसके पश्चात भैरव जी से माँ बगलामुखी की पूजा करने की आज्ञा लें – ” हे ! भैरव भगवान् मैं माँ पीताम्बरा की पूजा करने जा रहा/रही हूँ, कृपया मुझे अनुमति प्रदान करें। ” ऐसा बोलकर भैरव जी का ध्यान करें।  इसके बाद माँ बगलामुखी का ध्यान करें एवं उनका आवाहन करें। माँ को पीला प्रसाद चढ़ाएँ जैसे बादाम, किशमिश, मौसमी फल अथवा जो आपका दिल करे ( एक बच्चा अपनी माता को प्रेम से जो भी अर्पित कर देगा, माता प्रेम से वही स्वीकार कर लेगी )। उन्हें पुष्प समर्पित करें। इसके पश्चात माँ बगलामुखी सहस्रनाम (१००० नाम ) का पाठ करें और यदि हो सके तो प्रत्येक नाम के साथ माँ को पीला पुष्प अथवा बादाम या किशमिश समर्पित करें। लेकिन ऐसा करने के लिए आपको माता का चित्र एक बड़े थाल अथवा बड़े कपडे पर रखना होगा ताकि सामग्री बाहर जमीन पर न गिरे। जिनके पास कम समय है वो बगलामुखी अष्टोत्तर शतनाम (१०८ नाम ) का पाठ भी कर सकते है।  ये पाठ आप हमारी वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं जिनका लिंक हम निचे दे रहे हैं। आप जितना अधिक पूजा करना चाहे आप कर सकते हैं लेकिन ज्यादा न कर सको तो कम से कम माँ को प्रेम से एक पुष्प जरूर चढ़ा देना।




जो लोग दीक्षित है वो इसके बाद माँ बगलामुखी के मंत्र का जप हल्दी माला पर कर सकते हैं। जिन लोगो ने अभी तक माँ बगलामुखी की दीक्षा नहीं ली है वो इस दिन माँ बगलामुखी की दीक्षा ग्रहण कर सकते हैं।  पूजा समाप्त करने के पश्चात माँ बगलामुखी से अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगे एवं सदैव आपके परिवार के ऊपर कृपा बनाए रखने के लिए प्रार्थना करें।  इसके बाद एक माला मृत्युंजय मंत्र – ” हौं जूंं  सः ” का जप अवश्य करें।  पूजा करने के बाद प्रसाद सभी को बांट दें।

यदि किसी कारणवश आप स्वयं इस पूजा को नहीं कर सकते और आप अपने परिवार की सुख शान्ति, शत्रु पीड़ा से मुक्ति प्राप्त करने के लिए यह पूजा करना चाहते है तो हमने ऐसे  लोगों के लिए कल विशेष पूजा का आयोजन किया है।  अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें – 9410030994, 9540674788

 

Any one can do baglamukhi jayanti pooja whether he is initiated or not in baglamukhi mahavidya. This pooja can be done in morning or night. Everything should be yellow in baglamukhi pooja like clothes, prasaad, mat etc as one of the other name of devi baglamukhi is “Pitambara” which means yellow.

You should perform this pooja in front of devi baglamukhi photo or yantra. Your face should be in north or east direction. First do guru mantra “Om Sri Guruvey Namah” or if you gurudev has given you.

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Baglamukhi Mantra Utkilan Vidhaan बगलामुखी मंत्रोंत्कीलन-विधान

Baglamukhi Mantra Utkilan Vidhaan

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मंत्रों का दुरुपयोग रोकने के लिए कलियुग के प्रारम्भ में भगवान शिव ने सभी मंत्रों का कीलन (शापित) कर दिया था। तब माँ पार्वती के अनुग्रह करने पर उन्होंने मंत्रों को उत्कीलित करने का विधान भी प्रस्तुत किया ताकि सत्पात्र एवं अधिकारी साधक भी मंत्र की सिद्धि प्राप्त कर सकें। यही मंत्रोंत्कीलन-विधान मंत्र-उपासना के अंग के रूप में उत्कीलक कहे जाते हैं। इसलिए साधक को कवच आदि का पाठ करने से पूर्व उत्कीलन करना चाहिए।
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Bhagwati Baglamukhi Pitambara Sarva Jana Vashikaran Mantra in Hindi and English भगवती बगलामुखी सर्वजन वशीकरण मंत्र

Bhagwati Baglamukhi Pitambara Sarva Jana Vashikaran Mantra in Hindi and English भगवती बगलामुखी सर्वजन वशीकरण मंत्र

 

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मां बगलामुखी को सामान्यतः सभी लोग शत्रुओं का नाश करने वाली, उनकी गति, मति, बुद्धि का स्तम्भन करने वाली, मुकदमे एवं चुनाव आदि में विजय दिलाने वाली शक्ति के रूप में जानते हैं। लेकिन यह बात केवल कुछ ही लोग जानते हैं कि वे जगत का वशीकरण भी करने वाली हैं। यदि उनकी कृपा प्राप्त हो जाये तो साधक की ओर सभी आकर्षित होने लगते हैं, वह जंहा बोलता है, वंही उसे सुनने को जन समूह उमड़ पड़ता है। उसका दायरा बहुत व्यापक हो जाता है। कोई भी स्त्री, पुरूष, बच्चा उसके आकर्षण में ऐसा बंध जाता है कि अपनी सुध-बुध खो बैठता है और वही करने के लिए विवश हो जाता है, जो साधक चाहता है।
इस साधन को करने के लिए अति गोपनीय मंत्र का उल्लेख मैं यंहा साधकों के लिए कर रहा हॅू, लेकिन साधक सदैव स्मरण रखें कि ऐसी साधनाओं का दुष्प्रयोग कभी नहीं करना चाहिए अन्यथा साधक की साधना क्षीण होने लगती है। मंत्र का प्रयोग सदैव समाज कल्याण के लिए करना चाहिए, न कि समाज-विरोधी गतिविधियों के लिए ।
सर्वप्रथम भगवती बगलामुखी की मंत्र दीक्षा ग्रहण करें उसके पश्चात गुरू आज्ञानुसार साधना करें

Baglamukhi Vashikaran Mantra is considered as most powerful.

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