Shri Baglamukhi Hridaya Mantra in Hindi and Sanskrit देवी बगलामुखी हृदय मंत्र

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Devi Baglamukhi Hridaya Mantra in Hindi and Sanskrit देवी बगलामुखी हृदय मंत्र

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हृदय मंत्र को देवता का हृदय कहा जाता हैा इसके जप से देवता का सानिध्य बढ़ता है एवं सिद्ध होने पर दर्शन प्राप्त होते हैं। अपने गुरूदेव से इस मंत्र की दीक्षा लेकर ही इसका जप करें । कई बार ऐसा देखा गया है कि कुछ लोग साधना के प्रारम्भ में ही हृदय मंत्र का जप शुरू कर देते है और जैसे ही देवता का सानिध्य बढ़ता है तो घबरा जाते है और डर से अपनी साधना बीच में ही छोड़ देतें हैा इसलिए साधको को मेरा परामर्श है कि जब आपके गुरूदेव कहें तभी इसका जप करें । नये साधको को इसके स्थान पर बगलामुखी हृदय स्तोत्र का पाठ करना चाहिए ।

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साधको के लिए कुछ अनमोल बातें

भक्ति, श्रद्धा , विश्वास एवं धैर्य साधना मार्ग के चार स्तम्भ हैं। हमारी साधना का प्रतिफल इन्ही चार स्तम्भों पर निर्भर करता है। जो लोग ये कहते हैं की उन्हें मंत्रो से कोई लाभ नहीं मिला तो उन्हें समझ लेना चाहिए कि उनमे स्वयं ही कोई कमी है। आजकल ऐसा देखने में आता है कि लोग एक – दो अनुष्ठान करने के बाद ही अपना धैर्य खो देते हैं और अपने गुरु, मंत्र एवं इष्ट पर अविश्वास करने लगते हैं। एक साधक को इस तरह धैर्य नहीं खोना चाहिए। ऐसा कोई भी व्यक्ति इस संसार में नहीं है जिसे कोई कष्ट या दुःख नहीं है। स्वयं भगवान् राम एवं कृष्ण के जीवन से हमे ये सीख लेनी चहिये जिन्होंने अपने जीवन में अनेको कष्टों का सामना किया। जो लोग अविश्वास करके अथवा लाभ न मिलने के कारण गुरु, मंत्र एवं देवता को बदल देते हैं वो नरकगामी होते हैं एवं अन्य देवता भी उन्हें शरण नहीं देते। कितना भी कष्ट क्यों न आ जाये हमे अपने गुरु, मंत्र एवं देवता को नहीं त्यागना चहिये। प्राचीन काल में जितने भी साधक एवं ऋषि हुए हैं उन्होंने एक ही देवता की तब तक उपासना की है जब तक वो देवता स्वयं उनके सामने वरदान देने के लिए नहीं आ गये। रावण ने हजारों वर्ष तपस्या की एवं भगवान् को स्वयं आकर वरदान देने के लिए विवश कर दिया। हमें उन लोगो से सीख लेनी चाहिए। किसी भी मंत्र एवं देवता में उतनी ही शक्ति होती है जितना आपका उन पर विश्वास होता है।

 

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Baglamukhi Beej Mantra Evam Puja Sadhna Vidhi

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Baglamukhi Beej Mantra Evam Puja Sadhna Vidhi

Devi Baglamukhi Pitambara

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भगवती बगलामुखी  के इस मंत्र को महामंत्र के नाम से जाना जाता हैा ऐसा कहा जाता है कि भगवती बगलामुखी की उपासना करने वाले साधक के सभी कार्य बिना व्यक्त किये पूर्ण हो जाते हैं और जीवन की हर बाधा को वो हंसते हंसते पार कर जाते हैं।   मैनें स्वयं अपने जीवन में अनेको चमत्कार देखें हैं, जिनको सुनकर कोई भी यकीन नही करेगा लेकिन भगवती पीताम्बरा अपने भक्तों के ऊपर ऐसे ही कृपा करती हैं।  एकाक्षरी मंत्र माँ पीताम्बरा का बीज मंत्र है, इसके जप के बिना माँ पीताम्बरा की साधना पूर्ण नही होती । माँ पीताम्बरा की साधना इसी बीज मंत्र से प्रारम्भ होती है, एवं साधको को बीज मंत्र का नियमित रूप से कम से कम 21 माला का जप अवश्य करना चाहिए,  क्योंकि  बीज मंत्र में ही देवता के प्राण होते हैं।  जिस प्रकार बीज के बिना वृक्ष की कल्पना नही की जा सकती उसी तरह बीज मंत्र के जप के बिना साधना में सफलता के बारे में सोचना भी व्यर्थ है। भगवती की सेवा केवल मंत्र जप से ही नही होती है बल्कि उनके नाम का गुणगान करने से भी होती है । जिस प्रकार नारद ऋषि हर पल भगवान विष्णु का नाम जपते थे, उसी प्रकार सुधी साधको को माँ पीताम्बरा का नाम जप हर पल करना चाहिए एवं अन्य लोगो को भी उनके नाम की महिमा के बारे में बताना चाहिए । मैंने  अपने जीवन का केवल एक ही उद्देश्य बनाया है कि माँ पीताम्बरा के नाम को हर व्यक्ति तक पहुंचाना हैा आप सब भी यदि माँ की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो आज से ही भगवती के एकाक्षरी मंत्र को अपने जीवन में उतार लीजिए एवं माँ के नाम एवं उनकी महिमा का अधिक से अधिक प्रचार करना शुरू कर दीजिए। साधको के हितार्थ भगवती के बीज मंत्र की जानकारी यहां दे रहा हूँ, भगवती पीताम्बरा आप सब पर कृपा करें । 

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Baglamukhi Tarpan Vidhi, Baglamukhi Marjan Vidhi is also given in the article

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साधना को आरम्भ करने से पूर्व एक साधक को चाहिए कि वह मां भगवती  की उपासना अथवा अन्य किसी भी देवी या देवता की उपासना निष्काम भाव से करे। उपासना का तात्पर्य सेवा से होता है। उपासना के तीन भेद कहे गये हैं:- कायिक अर्थात् शरीर से , वाचिक अर्थात् वाणी से और मानसिक- अर्थात् मन से।  जब हम कायिक का अनुशरण करते हैं तो उसमें पाद्य, अर्घ्य, स्नान, धूप, दीप, नैवेद्य आदि पंचोपचार पूजन अपने देवी देवता का किया जाता है। जब हम वाचिक का प्रयोग करते हैं तो अपने देवी देवता से सम्बन्धित स्तोत्र पाठ आदि किया जाता है अर्थात् अपने मुंह से उसकी कीर्ति का बखान करते हैं। और जब मानसिक क्रिया का अनुसरण करते हैं तो सम्बन्धित देवता का ध्यान और जप आदि किया जाता है।
जो साधक अपने इष्ट देवता का निष्काम भाव से अर्चन करता है और लगातार उसके मंत्र का जप करता हुआ उसी का चिन्तन करता रहता है, तो उसके जितने भी सांसारिक कार्य हैं उन सबका भार मां स्वयं ही उठाती हैं और अन्ततः मोक्ष भी प्रदान करती हैं। यदि आप उनसे पुत्रवत् प्रेम करते हैं तो वे मां के रूप में वात्सल्यमयी होकर आपकी प्रत्येक कामना को उसी प्रकार पूर्ण करती हैं जिस प्रकार एक गाय अपने बछड़े के मोह में कुछ भी करने को तत्पर हो जाती है। अतः सभी साधकों को मेरा निर्देष भी है और उनको परामर्ष भी कि वे साधना चाहे जो भी करें, निष्काम भाव से करें। निष्काम भाव वाले साधक को कभी भी महाभय नहीं सताता। ऐसे साधक के समस्त सांसारिक और पारलौकिक समस्त कार्य स्वयं ही सिद्ध होने लगते हैं उसकी कोई भी किसी भी प्रकार की अभिलाषा अपूर्ण नहीं रहती ।
मेरे पास ऐसे बहुत से लोगों के फोन और मेल आते हैं जो एक क्षण में ही अपने दुखों, कष्टों का त्राण करने के लिए साधना सम्पन्न करना चाहते हैं। उनका उद्देष्य देवता या देवी की उपासना नहीं, उनकी प्रसन्नता नहीं बल्कि उनका एक मात्र उद्देष्य अपनी समस्या से विमुक्त होना होता है। वे लोग नहीं जानते कि जो कष्ट वे उठा रहे हैं, वे अपने पूर्व जन्मों में किये गये पापों के फलस्वरूप उठा रहे हैं। वे लोग अपनी कुण्डली में स्थित ग्रहों को देाष देते हैं, जो कि बिल्कुल गलत परम्परा है। भगवान शिव ने सभी ग्रहों को यह अधिकार दिया है कि वे जातक को इस जीवन में ऐसा निखार दें कि उसके साथ पूर्वजन्मों का कोई भी दोष न रह जाए। इसका लाभ यह होगा कि यदि जातक के साथ कर्मबन्धन शेष नहीं है तो उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाएगी। लेकिन हम इस दण्ड को दण्ड न मानकर ग्रहों का दोष मानते हैं।व्यहार में यह भी आया है कि जो जितनी अधिक साधना, पूजा-पाठ या उपासना करता है, वह व्यक्ति ज्यादा परेशान रहता है। उसका कारण यह है कि जब हम कोई भी उपासना या साधना करना आरम्भ करते हैं तो सम्बन्धित देवी – देवता यह चाहता है कि हम मंत्र जप के द्वारा या अन्य किसी भी मार्ग से बिल्कुल ऐसे साफ-सुुथरे हो जाएं कि हमारे साथ कर्मबन्धन का कोई भी भाग शेष न रह जाए।

Baglamukhi Mantra in Hindi Part 1

Baglamukhi Mantra in Hindi Part 2

Baglamukhi Mantra in Hindi Part 3

Baglamukhi Mantra in Hindi Part 4

Baglamukhi Mantra in Hindi Part 5

Baglamukhi Mantra in Hindi Part 6

Baglamukhi Mantra in Hindi Part 7

Baglamukhi Mantra in Hindi Part 8

Baglamukhi Mantra in Hindi Part 9

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I am very pleased to say that we are taking a next step ahead in the field of spirituality by digitalizing all the available Sanskrit texts in the world related to secret mantras, tantras and yantras. In the first phase we will digitalize all the content provided by shri yogeshwaranand ji regarding das mahavidyas. We will not only make it available for Hindi and Sanskrit readers but also translate it into English so that whole world can get the benefits from our work. I can’t do it alone. To do the same I request all of you to help me achieve this goal.
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Sumit Girdharwal
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Haridra Ganesha Mantra Sadhana Evam Siddhi in Hindi

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Haridra Ganapati Mantra Sadhana Evam Siddhi

yogeshwaranand guru ji baglamukhi  upasak

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हरिद्रा गणपति मां बगलामुखी के अंग देवता है। इसलिए जो साधक बगलामुखी की आराधना करते हैं, उन्हें हरिद्रा गणपति की साधना, पूजा अवश्य करनी चाहिए। इनकी साधना करने से शत्रु   का हृदय द्रवित होकर साधक के वशीभूत हो जाता है। इनकी साधना अभिचारिक कर्म को भी नष्ट करने के लिए की जाती है। यही कारण है कि मां त्रिपुरसुन्दरी के द्वारा स्मरण किये जाने पर हरिद्रा गणपति ने प्रकट होकर भण्डासुर दैत्य के द्वारा किये गये अभिचार यंत्र को नष्ट कर दिया था।
हरिद्रा हल्दी को कहा जाता है। सभी साधक जानते हैं कि विवाह आदि जैसे मंगल कार्यो में हल्दी पाउडर के लेप का प्रयोग किया जाता है। उसका कारण यह है कि हल्दी को अति शुभ, सुख-सौभाग्य दायक एवं विघ्न विनाशक माना जाता है। हल्दी अनेकों बीमारियों में भी अचूक अस्त्र की भांति कार्य करती है। इसीलिए हरिद्रा गणपति को अत्यन्त ही  शुभ माना जाता है। काम्य प्रयोग में विशेष रूप से इनकी साधना मनवांछित विवाह, पुत्र प्राप्ति, मनोवांछित फल प्राप्ति एवं शत्रु को वश में करने के लिए की जाती है।

 

 

 

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Haridra Ganpati Haridra Ganesha Mantra Sadhna

HARIDRA GANAPATI  has protective powers. No body can harm you if you worship Haridra form of Ganapati regularly. Haridra Ganapati is worshipped for the fulfillment of desires and accomplishment of auspicious endeavours. Haridra Ganesha is also worshipped by devotees who seek help to come out of their legal troubles. Haridra Ganapati should be worshipped everyday by reciting Below Mantra for eliminating all sorts of fears and for attaining intelligence, wealth and success.

 

 

 

 

 

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Baglamukhi Mala Mantra in Hindi, Sanskrit and English

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Baglamukhi Mala Mantra

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Baglamukhi Mala Mantra benefits : Baglamukhi Mantra is very well known for success in love, studies, money and business. Baglamukhi mantra gives overall success in life. It is the best mantra to win in court cases. It is more effective in destruction of the enemies. Baglamukhi Mala Mantra is also used for Grah Shanti (Grah Dosha Nivaran).

बगलामुखी माला मंत्र हिंदी एवं संस्कृत में

Baglamukhi Mala Mantra in Hindi and Sanskrit

Baglamukhi Mala Mantra in Hindi and Sanskrit

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Introduction of Dus Mahavidya Baglamukhi in Hindi

अष्टम  महाविद्या बगलामुखी का  परिचय हिंदी में                                                     Download this Article

 

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Baglamukhi Information in Hindi

भगवती बगला सुधा-समुद्र के मध्य में स्थित मणिमय  मण्डप में रत्नवेदी पर रत्नमय सिंहासन पर विराजती हैं।  पीतवर्णा होने के कारण ये पीत रंग के ही वस्त्र, आभूषण व माला धारण किये हुए हैं।इनके एक हाथ में शत्रु की  जिह्वा  और दूसरे हाथ में मुद्गर  है। व्यष्टि रूप में शत्रुओं का नाश करने वाली और समष्टि रूप में परम ईश्वर की सहांर-इच्छा  की अधिस्ठात्री शक्ति बगला है।

श्री प्रजापति ने बगला उपासना वैदिक रीती से की और वे सृस्टि की संरचना करने में सफल हुए। श्री प्रजापति ने इस    विद्या का उपदेश सनकादिक मुनियों को दिया।  सनत्कुमार ने इसका उपदेश श्री नारद को और श्री नारद ने सांख्यायन  परमहंस को दिया, जिन्होंने छत्तीस पटलों में “बगला तंत्र” ग्रन्थ की रचना की। “स्वतंत्र तंत्र” के अनुसार भगवान् विष्णु  इस विद्या के उपासक हुए। फिर श्री परशुराम जी और आचार्य द्रोण इस विद्या के उपासक हुए। आचार्य द्रोण ने यह  विद्या परशुराम जी से ग्रहण की।

श्री बगला महाविद्या ऊर्ध्वाम्नाय के अनुसार ही उपास्य हैं, जिसमें स्त्री (शक्ति) भोग्या नहीं बल्कि पूज्या है। बगला    महाविद्या “श्री कुल” से सम्बंधित हैं और अवगत हो कि श्रीकुल की सभी महाविद्याओं की उपासना अत्यंत सावधानी पूर्वक गुरु के मार्गदर्शन में शुचिता बनाते हुए, इन्द्रिय निग्रह पूर्वक करनी चाहिए। फिर बगला शक्ति तो अत्यंत तेजपूर्ण शक्ति हैं, जिनका उद्भव ही स्तम्भन हेतु हुआ था। इस विद्या के प्रभाव से ही महर्षि  च्यवन ने इंद्र के वज्र को स्तंभित कर दिया था। श्रीमद् गोविंदपाद की समाधि में विघ्न डालने से रोकने के लिए आचार्य श्री शंकर ने रेवा नदी का स्तम्भन इसी महाविद्या के प्रभाव से किया था। महामुनि श्री निम्बार्क ने कस्सी ब्राह्मण को इसी विद्या के प्रभाव से नीम के वृक्ष पर, सूर्यदेव का दर्शन कराया था। श्री बगलामुखी को “ब्रह्मास्त्र विद्या” के नामे से भी जाना जाता है।  शत्रुओं का दमन और विघ्नों का शमन करने में विश्व में इनके समकक्ष कोई अन्य देवता नहीं है।

Baglamukhi Mantra in Hindi
Baglamukhi Mantras in Hindi

भगवती बगलामुखी को स्तम्भन की देवी कहा गया है।  स्तम्भनकारिणी शक्ति नाम रूप से व्यक्त एवं अव्यक्त सभी पदार्थो की स्थिति का आधार पृथ्वी के रूप में शक्ति ही है, और बगलामुखी उसी स्तम्भन शक्ति की अधिस्ठात्री देवी हैं।  इसी स्तम्भन शक्ति से ही सूर्यमण्डल स्थित है, सभी लोक इसी शक्ति के प्रभाव से ही स्तंभित है।  अतः साधक गण को चाहिये कि ऐसी महाविद्या कि साधना सही रीति व विधानपूर्वक ही करें।

अब हम साधकगण को इस महाविद्या के विषय में कुछ और जानकारी देना आवश्यक समझते है, जो साधक इस साधना को पूर्ण कर, सिद्धि प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें इन तथ्यो की जानकारी होना अति आवश्यक है।

1 ) कुल : – महाविद्या बगलामुखी “श्री कुल” से सम्बंधित है।

2 ) नाम : - बगलामुखी, पीताम्बरा , बगला , वल्गामुखी , वगलामुखी , ब्रह्मास्त्र विद्या

3 ) कुल्लुका : - मंत्र जाप से पूर्व उस मंत्र कि कुल्लुका का न्यास सिर में किया जाता है। इस विद्या की कुल्लुका “ॐ हूं छ्रौम्” (OM HOOM Chraum)

4)  महासेतु  : - साधन काल में जप से पूर्व ‘महासेतु’ का जप किया जाता है।  ऐसा करने से लाभ यह होता है कि साधक प्रत्येक समय, प्रत्येक स्थिति में जप कर सकता है।  इस महाविद्या का महासेतु “स्त्रीं” (Streem)  है।  इसका जाप कंठ स्थित विशुद्धि चक्र में दस बार किया जाता है।

5)  कवचसेतु :- इसे मंत्रसेतु भी कहा जाता है।  जप प्रारम्भ करने से पूर्व इसका जप एक हजार बार किया जाता है।  ब्राह्मण व छत्रियों के लिए “प्रणव “, वैश्यों  के लिए “फट” तथा शूद्रों के लिए “ह्रीं” कवचसेतु  है।

6 ) निर्वाण :-  “ह्रूं ह्रीं श्रीं” (Hroom Hreem Shreem) से सम्पुटित मूल मंत्र का जाप ही इसकी निर्वाण विद्या है। इसकी दूसरी विधि यह है कि पहले प्रणव कर, अ , आ , आदि स्वर तथा क, ख , आदि व्यंजन पढ़कर मूल मंत्र पढ़ें और अंत में “ऐं” लगाएं और फिर विलोम गति से पुनरावृत्ति करें।

7 ) बंधन :- किसी विपरीत या आसुरी बाधा को रोकने के लिए इस मंत्र का एक हजार बार जाप किया जाता है। मंत्र इस प्रकार है ” ऐं ह्रीं ह्रीं ऐं ” (Aim Hreem Hreem Aim)

8) मुद्रा :- इस विद्या में योनि मुद्रा का प्रयोग किया जाता है।

9) प्राणायाम : -  साधना से पूर्व दो मूल मंत्रो से रेचक, चार मूल मंत्रो से पूरक तथा दो मूल मंत्रो से कुम्भक करना चाहिए। दो मूल मंत्रो से रेचक, आठ मूल मंत्रो से पूरक तथा चार मूल मंत्रो से कुम्भक करना और भी अधिक लाभ कारी है।

10 ) दीपन :-  दीपक जलने से जैसे रोशनी हो जाती है, उसी प्रकार दीपन से मंत्र प्रकाशवान हो जाता है। दीपन करने हेतु मूल मंत्र को योनि बीज ” ईं ” ( EEM ) से संपुटित कर सात बार जप करें

11) जीवन अथवा प्राण योग : – बिना प्राण अथवा जीवन के मन्त्र निष्क्रिय होता है,  अतः मूल मन्त्र के आदि और अन्त में माया बीज “ह्रीं” (Hreem) से संपुट लगाकर सात बार जप करें ।

12 ) मुख शोधन : –  हमारी जिह्वा अशुद्ध रहती है, जिस कारण उससे जप करने पर लाभ के स्थान पर हानि ही होती है। अतः “ऐं ह्रीं  ऐं ” मंत्र से दस बार जाप कर मुखशोधन करें

13 ) मध्य दृस्टि : - साधना के लिए मध्य दृस्टि आवश्यक है। अतः मूल मंत्र के प्रत्येक अक्षर के आगे पीछे “यं” (Yam) बीज का अवगुण्ठन कर मूल मंत्र का पाँच बार जप करना चाहिए।

14 ) शापोद्धार : - मूल मंत्र के जपने से पूर्व दस बार इस मंत्र का जप करें –

” ॐ हलीं बगले ! रूद्र शापं विमोचय विमोचय ॐ ह्लीं स्वाहा ”

(OM Hleem Bagale ! Rudra Shaapam Vimochaya Vimochaya  OM Hleem Swaahaa )

15 ) उत्कीलन : - मूल मंत्र के आरम्भ में ” ॐ ह्रीं स्वाहा ” मंत्र का दस बार जप करें।

16 ) आचार :-  इस विद्या के दोनों आचार हैं, वाम भी और दक्षिण भी ।

17 ) साधना में सिद्धि प्राप्त न होने पर उपाय : -  कभी कभी ऐसा देखने में आता हैं कि बार बार साधना करने पर भी सफलता हाथ नहीं आती है। इसके लिए आप निम्न वर्णित उपाय करें –

a) कर्पूर, रोली, खास और चन्दन की स्याही से, अनार की कलम से भोजपत्र पर वायु बीज “यं” (Yam) से मूल मंत्र को अवगुण्ठित कर, उसका षोडशोपचार पूजन करें। निश्चय ही सफलता मिलेगी।

b) सरस्वती बीज “ऐं” (Aim)  से मूल मंत्र को संपुटित कर एक हजार जप करें।

c)  भोजपत्र पर गौदुग्ध से मूल मंत्र लिखकर उसे दाहिनी भुजा पर बांध लें। साथ ही मूल मंत्र को “स्त्रीं” (Steem)  से सम्पुटित कर उसका एक हजार जप करें

18 ) विशेष : - गंध,पुष्प, आभूषण, भगवती के सामने रखें। दीपक देवता के दायीं ओर व धूपबत्ती बायीं ओर रखनी चाहिए। नैवेद्य (Sweets, Dry Fruits ) भी देवता के दायीं ओर ही रखें। जप के उपरान्त आसन से उठने से पूर्व ही अपने द्वारा किया जाप भगवती के बायें हाथ में समर्पित कर दें।

अतः ऐसे साधक गण जो किन्ही भी कारणो से यदि अभी तक साधना में सफलता प्राप्त नहीं कर सकें हैं, उपर्युक्त निर्देशों का पालन करते हुए पुनः एक बार फिर संकल्प लें, तो निश्चय ही पराम्बा पीताम्बरा की कृपा दृस्टि उन्हें प्राप्त होगी – ऐसा मेरा पूर्ण विश्वास है।

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18. Dusmahavidya Mahakali Sadhana

19. Shri Balasundari Triyakshari Mantra Sadhana

20. Sri Vidya Sadhana

21. Click Here to Download Sarabeswara Kavacham

22. Click Here to Download Sharabh Tantra Prayoga

23. Click Here to Download Swarnakarshan Bhairav Mantra Sadhana Vidhi By Gurudev Shri Yogeshwaranand Ji

Introduction of Eighth Mahavidya Baglamukhi in Hindi महाविद्या बगलामुखी परिचय हिंदी में

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Introduction of Dus Mahavidya Baglamukhi in Hindi

अष्टम  महाविद्या बगलामुखी का  परिचय हिंदी में

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Baglamukhi Information in Hindi

भगवती बगला सुधा-समुद्र के मध्य में स्थित मणिमय  मण्डप में रत्नवेदी पर रत्नमय सिंहासन पर विराजती हैं।  पीतवर्णा होने के कारण ये पीत रंग के ही वस्त्र, आभूषण व माला धारण किये हुए हैं।इनके एक हाथ में शत्रु की  जिह्वा और दूसरे हाथ में मुद्गर  है। व्यष्टि रूप में शत्रुओं का नाश करने वाली और समष्टि रूप में परम ईश्वर की सहांर-इच्छा की अधिस्ठात्री शक्ति बगला है।

श्री प्रजापति ने बगला उपासना वैदिक रीती से की और वे सृस्टि की संरचना करने में सफल हुए। श्री प्रजापति ने इस विद्या का उपदेश सनकादिक मुनियों को दिया।  सनत्कुमार ने इसका उपदेश श्री नारद को और श्री नारद ने सांख्यायन परमहंस को दिया, जिन्होंने छत्तीस पटलों में “बगला तंत्र” ग्रन्थ की रचना की। “स्वतंत्र तंत्र” के अनुसार भगवान् विष्णु इस विद्या के उपासक हुए। फिर श्री परशुराम जी और आचार्य द्रोण इस विद्या के उपासक हुए। आचार्य द्रोण ने यह विद्या परशुराम जी से ग्रहण की।

baglamukhi mantra in hindi

श्री बगला महाविद्या ऊर्ध्वाम्नाय के अनुसार ही उपास्य हैं, जिसमें स्त्री (शक्ति) भोग्या नहीं बल्कि पूज्या है। बगला महाविद्या “श्री कुल” से सम्बंधित हैं और अवगत हो कि श्रीकुल की सभी महाविद्याओं की उपासना अत्यंत सावधानी पूर्वक गुरु के मार्गदर्शन में शुचिता बनाते हुए, इन्द्रिय निग्रह पूर्वक करनी चाहिए। फिर बगला शक्ति तो अत्यंत तेजपूर्ण शक्ति हैं, जिनका उद्भव ही स्तम्भन हेतु हुआ था। इस विद्या के प्रभाव से ही महर्षि  च्यवन ने इंद्र के वज्र को स्तंभित कर दिया था। श्रीमद् गोविंदपाद की समाधि में विघ्न डालने से रोकने के लिए आचार्य श्री शंकर ने रेवा नदी का स्तम्भन इसी महाविद्या के प्रभाव से किया था। महामुनि श्री निम्बार्क ने कस्सी ब्राह्मण को इसी विद्या के प्रभाव से नीम के वृक्ष पर, सूर्यदेव का दर्शन कराया था। श्री बगलामुखी को “ब्रह्मास्त्र विद्या” के नामे से भी जाना जाता है।  शत्रुओं का दमन और विघ्नों का शमन करने में विश्व में इनके समकक्ष कोई अन्य देवता नहीं है।

भगवती बगलामुखी को स्तम्भन की देवी कहा गया है।  स्तम्भनकारिणी शक्ति नाम रूप से व्यक्त एवं अव्यक्त सभी पदार्थो की स्थिति का आधार पृथ्वी के रूप में शक्ति ही है, और बगलामुखी उसी स्तम्भन शक्ति की अधिस्ठात्री देवी हैं।  इसी स्तम्भन शक्ति से ही सूर्यमण्डल स्थित है, सभी लोक इसी शक्ति के प्रभाव से ही स्तंभित है।  अतः साधक गण को चाहिये कि ऐसी महाविद्या कि साधना सही रीति व विधानपूर्वक ही करें।

अब हम साधकगण को इस महाविद्या के विषय में कुछ और जानकारी देना आवश्यक समझते है, जो साधक इस साधना को पूर्ण कर, सिद्धि प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें इन तथ्यो की जानकारी होना अति आवश्यक है।

1 ) कुल : – महाविद्या बगलामुखी “श्री कुल” से सम्बंधित है।

2 ) नाम : - बगलामुखी, पीताम्बरा , बगला , वल्गामुखी , वगलामुखी , ब्रह्मास्त्र विद्या

3 ) कुल्लुका : - मंत्र जाप से पूर्व उस मंत्र कि कुल्लुका का न्यास सिर में किया जाता है। इस विद्या की कुल्लुका “ॐ हूं छ्रौम्” (OM HOOM Chraum)

4)  महासेतु  : - साधन काल में जप से पूर्व ‘महासेतु’ का जप किया जाता है।  ऐसा करने से लाभ यह होता है कि साधक प्रत्येक समय, प्रत्येक स्थिति में जप कर सकता है।  इस महाविद्या का महासेतु “स्त्रीं” (Streem)  है।  इसका जाप कंठ स्थित विशुद्धि चक्र में दस बार किया जाता है।

5)  कवचसेतु :- इसे मंत्रसेतु भी कहा जाता है।  जप प्रारम्भ करने से पूर्व इसका जप एक हजार बार किया जाता है।  ब्राह्मण व छत्रियों के लिए “प्रणव “, वैश्यों  के लिए “फट” तथा शूद्रों के लिए “ह्रीं” कवचसेतु  है।

6 ) निर्वाण :-  “ह्रूं ह्रीं श्रीं” (Hroom Hreem Shreem) से सम्पुटित मूल मंत्र का जाप ही इसकी निर्वाण विद्या है। इसकी दूसरी विधि यह है कि पहले प्रणव कर, अ , आ , आदि स्वर तथा क, ख , आदि व्यंजन पढ़कर मूल मंत्र पढ़ें और अंत में “ऐं” लगाएं और फिर विलोम गति से पुनरावृत्ति करें।

7 ) बंधन :- किसी विपरीत या आसुरी बाधा को रोकने के लिए इस मंत्र का एक हजार बार जाप किया जाता है। मंत्र इस प्रकार है ” ऐं ह्रीं ह्रीं ऐं ” (Aim Hreem Hreem Aim)

8) मुद्रा :- इस विद्या में योनि मुद्रा का प्रयोग किया जाता है।

9) प्राणायाम : -  साधना से पूर्व दो मूल मंत्रो से रेचक, चार मूल मंत्रो से पूरक तथा दो मूल मंत्रो से कुम्भक करना चाहिए। दो मूल मंत्रो से रेचक, आठ मूल मंत्रो से पूरक तथा चार मूल मंत्रो से कुम्भक करना और भी अधिक लाभ कारी है।

10 ) दीपन :-  दीपक जलने से जैसे रोशनी हो जाती है, उसी प्रकार दीपन से मंत्र प्रकाशवान हो जाता है। दीपन करने हेतु मूल मंत्र को योनि बीज ” ईं ” ( EEM ) से संपुटित कर सात बार जप करें

11) जीवन अथवा प्राण योग : – बिना प्राण अथवा जीवन के मन्त्र निष्क्रिय होता है,  अतः मूल मन्त्र के आदि और अन्त में माया बीज “ह्रीं” (Hreem) से संपुट लगाकर सात बार जप करें ।

12 ) मुख शोधन : –  हमारी जिह्वा अशुद्ध रहती है, जिस कारण उससे जप करने पर लाभ के स्थान पर हानि ही होती है। अतः “ऐं ह्रीं  ऐं ” मंत्र से दस बार जाप कर मुखशोधन करें

13 ) मध्य दृस्टि : - साधना के लिए मध्य दृस्टि आवश्यक है। अतः मूल मंत्र के प्रत्येक अक्षर के आगे पीछे “यं” (Yam) बीज का अवगुण्ठन कर मूल मंत्र का पाँच बार जप करना चाहिए।

14 ) शापोद्धार : - मूल मंत्र के जपने से पूर्व दस बार इस मंत्र का जप करें –
” ॐ हलीं बगले ! रूद्र शापं विमोचय विमोचय ॐ ह्लीं स्वाहा ”

(OM Hleem Bagale ! Rudra Shaapam Vimochaya Vimochaya  OM Hleem Swaahaa )

15 ) उत्कीलन : - मूल मंत्र के आरम्भ में ” ॐ ह्रीं स्वाहा ” मंत्र का दस बार जप करें।

16 ) आचार :-  इस विद्या के दोनों आचार हैं, वाम भी और दक्षिण भी ।

17 ) साधना में सिद्धि प्राप्त न होने पर उपाय : -  कभी कभी ऐसा देखने में आता हैं कि बार बार साधना करने पर भी सफलता हाथ नहीं आती है। इसके लिए आप निम्न वर्णित उपाय करें –

a) कर्पूर, रोली, खास और चन्दन की स्याही से, अनार की कलम से भोजपत्र पर वायु बीज “यं” (Yam) से मूल मंत्र को अवगुण्ठित कर, उसका षोडशोपचार पूजन करें। निश्चय ही सफलता मिलेगी।

b) सरस्वती बीज “ऐं” (Aim)  से मूल मंत्र को संपुटित कर एक हजार जप करें।

c)  भोजपत्र पर गौदुग्ध से मूल मंत्र लिखकर उसे दाहिनी भुजा पर बांध लें। साथ ही मूल मंत्र को “स्त्रीं” (Steem)  से सम्पुटित कर उसका एक हजार जप करें

18 ) विशेष : - गंध,पुष्प, आभूषण, भगवती के सामने रखें। दीपक देवता के दायीं ओर व धूपबत्ती बायीं ओर रखनी चाहिए। नैवेद्य (Sweets, Dry Fruits ) भी देवता के दायीं ओर ही रखें। जप के उपरान्त आसन से उठने से पूर्व ही अपने द्वारा किया जाप भगवती के बायें हाथ में समर्पित कर दें।

अतः ऐसे साधक गण जो किन्ही भी कारणो से यदि अभी तक साधना में सफलता प्राप्त नहीं कर सकें हैं, उपर्युक्त निर्देशों का पालन करते हुए पुनः एक बार फिर संकल्प लें, तो निश्चय ही पराम्बा पीताम्बरा की कृपा दृस्टि उन्हें प्राप्त होगी – ऐसा मेरा पूर्ण विश्वास है।

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Baglamukhi Puja Mantra Vidhi in Hindi and English

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Baglamukhi Mantra Jaap Puja Vidhi in Hindi and English PDF

After receiving so many requests from the readers of this blog we are publishing all the mantras of ma baglamukhi including their viniyoga, Rishiyadi-Nyasa, Shadanga-Nyasa, Kara-Nyasa in Hindi and English. It will not only help english readers but also those readers who are not very good at sanskrit pronunciation. It took a lot of effort to publish such a document but it is my dedication to provide more and more information to the people who worship ma pitambara. I dedicate this work to ma pitambara’s lotus feet and my father and my guru shri yogeshwaranand ji who taught me everything. I will add more info in this document in near future. Please let me know if you find any mistake in english, hindi or sanskrit. Please visit this blog again and again for more and updated information.

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Baglamukhi Sadhana Evam Puja Vidhi in Hindi

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Baglamukhi anusthan to get blessings of ma baglamukhi

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What is baglamukhi anusthan ?

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If Sadhak (aspirant) completes all the below steps then it is said that he/she has completed anusthan or purascharan of baglamukhi mantra.

1. Chant Baglamukhi mantra 1,25,000 times in 11, 21, 36, 40 days as per your convenience.

2. Do yagya (homa) of Twelve thousand five hundred (12,500) mantras after completing the 1,25,000 japa.

3. Do Tarpan with  One Thousand One Hundred fifty (1250) mantras after yagya.

4. Do Marjan with One Hundred Twenty Five (125 ) mantras after tarpan

5. Offer food to 11 brahmins at the end and offer something to your guru and take blessings of your guru & parents.

 

Sadhak needs to follow the below rules while doing baglamukhi anusthan.

1. Baglamukhi anusthan ( Baglamukhi puja ) can be done at home. Sadhak does not need to go any temple.

2. Place a baglamukhi photo & yantra at your puja temple.

3. Sadhak must do constant number of mantra jaap everyday. For example if you want to complete your anusthan in 40 days then 32 malas needs to be done everyday. In case in the beginning of anusthan if you are not able to do 32 malas then you can start with less number and then increase day by day. Numbers of malas can be increased but can not be decreased.

4. Haldi Mala ( Rosary of 108 beads which is made up of turmeric) should be used to chant baglamukhi mantra. A rosary has one hundred eight beads but only hundred mantras are counted. For example if sadhak completes 10 malas it means he/she has chanted 1000 mantras. 80 mantras will not be counted. So to complete 1,25,000 mantra japa sadhak has to do 1250 malas.

5. Sadhak should maintain the celibacy in anusthan period.
6. Sadhak must sit on yellow asana , must wear yellow clothes & should offer yellow sweets to ma baglamukhi.

7. In anusthan period do not hurt anyone & keep silence as mush as possible.

8. Bhakti is the root of success in sadhana. If you are devoted to the lotus feet of ma then all above said rules can be ignored. There is no rule between Bhakt & Bhagwaan.

Few words for sadhak

 

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Below are the few articles written by Shri Yogeshwaranand Ji in hindi

1. Click Here to Download Baglamukhi Chalisa in Hindi Pdf

2. Collection of All the Mantras of Ma Baglamukhi 

3. Baglamukhi Sahasranamawali in Hindi Pdf

4. Baglamukhi Yantra Puja

5. Baglamukhi Puja Vidhi in Simple Way

6. Baglamukhi Pratyangira Kavach

7. Baglamukhi bhakt mandaar mantra in hindi pdf

 

Baglamukhi Puja Benefits

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Baglamukhi Puja Benefits

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Maa baglamukhi maintains the eighth significant position among all the ten (Das) Mahavidya’s. Bagalamukhi Puja is performed according to Vedic rituals. This puja helps to defeat our external enemies as well as internal enemies i.e kama, krodha, lobha, moha & ahankar. With this puja sadhak gets control not only over their negative thoughts but also they have a full control over the external world. Puja of ma baglamukhi gives the sadhak self knowledge along with immense strength and power to lead a right path in his life.

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baglamukhi mata

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1. Click Here to Download All the Secret Mantras of Ma Baglamukhi by Shri Yogeshwaranand Ji

2. Click Here to Download Ma Baglamukhi Sadhana and Puja Vidhi In Hindi Pdf

3. Click Here to Download Various Rare and Powerful Mantras in Hindi PDF

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5. Click Here to Download Baglamukhi Bhakt Mandaar Mantra in Hindi Pdf

6. Click Here to Download Mahamrityunjaya Mantra Sadhana Puja Evam Anusthan Vidhi

7. Click Here to Download Ma Baglamukhi Mantra Diksha Vidhi

8. Click Here to Download Baglamukhi Chalisa in Hindi Pdf

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Ma Baglamukhi puja is very effective for those who are facing problems in business, career, adverse incidents, debt. This puja also helps to recover back money for those who have lost hope of getting their money back. The results are realized instantly after the accomplishment of this puja. Baglamukhi puja evokes innumerable advantages for all round protection, prosperity stability and blesses with long life. The goddess also blesses her sadhak in the form of immense power to dominate or defeat. Also, he gains an ability to create a strong influence over others. In tantra sadhna of Dus Mahavidya sadhaks consider Ma Baglamukhi to give immediate results and person is protected from all sorts of legal problems, adverse incidents, possibility of accidents and an anticipated unnatural events. This Sadhna evokes innumerable advantages for all round protection, prosperity stability and blesses with long life. The aspirant sadhak, having perfected Ma Baglamukhi get all Ashtsidhis, after which he progresses spiritually and gets the physical energy or intensity to rescue from all troubles, gets all the desires fulfilled. The goddess also blesses her sadhak in the form of immense power, supremacy, and dominance. Also, he gains an ability to create a strong influence over others.

However, it is not fair to represent Baglamukhi (as many have done) as the goddess of black power or black magic. In fact this is only one small aspect of the complete picture. Although it is true that Baglamukhi Mahavidya is generally known for Her protective power, another important aspect of this mahavidya is that She is a granter of prosperity. She is fully capable of granting all desirable things to her devotees. Health, wealth, attraction, and the Ultimate Liberation (Salvation) are the fruit of her devotion. A devotee who performs her sadhna will never be destroyed by his enemies. Unnatural death, uncontrolled diseases, unnatural tragedies can never affect her sadhak. In practice, there exist mutually exclusive mantras for the attainment of prosperity and victory over enemies by the grace of this mahaviyda, which is called “Mandaar Vidya”

Shri Baglamukhi Sadhana Rahasya By Shri Yogeshwaranand Ji

Shri Baglamukhi Sadhana Rahasya is the upcoming book of Gurudev Shri Yogeshwaranand Ji on Ma Baglamukhi. Only limited copies of this book are going to be published. If you want to secure your copy before all sold out please make a payment of Rs 680 into the below A/C
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Jai Ma Pitambara

Baglamukhi Chalisa in Hindi Pdf from Pitambara Peeth Datia

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Baglamukhi Chalisa given below has been published by Pitambara Peeth Datia.
(पीताम्बरा  पीठ दतिया  से प्रकाशित बगलामुखी चालीसा)

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Mata baglamukhi Photo Image taken from pitambara shakti peeth

Mother Baglamukhi is that cosmic energy, which helps a person to conquer all his negative traits and raise his consciousness to higher levels by destroying his false ego and his diseases, sorrows and enemies. Only when a person escapes these negative influences can become determined, resolute and intelligent and go on to become a perfect human being. Any one can recite the below given Baglamukhi Chalisa at the time of Puja. To appease the mother one should wear yellow clothes. Baglamukhi Sadhak should offer yellow flowers onto the lotus feet of mother.

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Bija Mantra of Ma Baglamukhi is Hlreem. If you have never done this sadhana before then you should start your Sadhana from this bija mantra. You should take the diksha of baglamukhi bija mantra from your gurudev  and then you should do the anusthan or purascharan of this mantra. After the completion of purascharan you should recite some mala of this mantra everyday. You can do one,five,eleven,twenty one or more  malas everyday.  This bija mantra of ma baglamukhi will protect you from every evil power. If some one is creating hurdles in your life then ma will protect you as a child. This mantra can also protect you from false court cases and makes you winner. If you are facing the shani sadesati or under the dashas of malefic  planets and facing lots of problems in your life then Ma Pitambara is the only shelter which can create a hope in your life. If you are willing to die or having no hope then try this sadhana only once. I have no words to say anything about ma pitambara and her grace on her child but yes i can promise you that once you are under her shelter then  you will never look back in your life. Success will become your servant. I also want to make people aware about a wrong belief. People think that Ma Baglamukhi is cruel and if they will commit any mistake in her worship then   they will be punished. It is not true. I am aware of lots of people who even did not chant her mantra properly but still they got all the benefits which they should have got only after chanting the correct mantra . Never have any kind of fear in your mind. She is cruel only for your enemies but not for you. Every mother will become baglamukhi if someone would create any troubles for her child. Same concept applies here. So don’t waste your time, take diksha (initiation) of baglamukhi  mantra and start sadhana without any confusion.

माँ बगलामुखी की साधना करने के लिए सबसे पहले एकाक्षरी मंत्र ह्ल्रीं की दीक्षा अपने गुरुदेव के मुख से प्राप्त करें। एकाक्षरी मंत्र के एक लाख दस हजार
जप करने के पश्चात क्रमशः चतुराक्षरी, अष्टाक्षरी , उन्नीसाक्षरी, छत्तीसाक्षरी (मूल मंत्र ) आदि मंत्रो की दीक्षा अपने गुरुदेव से प्राप्त करें एवं गुरु आदेशानुसार मंत्रो का जाप संपूर्ण करें। कुछ ध्यान योग्य बातें बगलामुखी आराधना में निम्न बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है। साधना में पीत वस्त्र धारण करना चाहिए एवं पीत वस्त्र का ही आसन लेना चाहिए। आराधना में पूजा की सभी वस्तुएं पीले रंग की होनी चाहिए। आराधना खुले आकाश के नीचे नहीं करनी चाहिए। आराधना काल में पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए तथा साधना क्रम में स्त्री स्पर्श, चर्चा और संसर्ग कतई नहीं करना चाहिए। बगलामुखी देवी अपने साधक की परीक्षा भी लेती हैं। साधना गुरु की आज्ञा लेकर ही करनी चाहिए और शुरू करने से पहले गुरु का ध्यान और पूजन अवश्य करना चाहिए। बगलामुखी के भैरव मृत्युंजय हैं, इसलिए साधना के पूर्व महामृत्युंजय मंत्र का एक माला जप अवश्य करना चाहिए। मंत्र का जप हल्दी की माला से करना चाहिए। साधना रात्रि में 9 बजे से 2 बजे के बीच करनी चाहिए। मंत्र के जप की संख्या निर्धारित होनी चाहिए और रोज उसी संख्या से जप करना चाहिए। यह संख्या साधक को स्वयं तय करना चाहिए। साधना गुप्त रूप से होनी चाहिए। साधना काल में दीप अवश्य जलाया जाना चाहिए। जो जातक इस बगलामुखी साधना को पूर्ण कर लेता है, वह अजेय हो जाता है, उसके शत्रु उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाते।

यदि एक बार आपने यह साधना पूर्ण कर ली तो इस संसार में ऐसी कोई भी वस्तु नहीं है जिसे आप प्राप्त नहीं कर सकते। यदि आप भोग विलास के पीछे दौड़ेंगे तो आपकी यह दौड़ कभी भी समाप्त नहीं होगी। लेकिन यदि आपका लक्ष्य प्रभु प्राप्ति होगा तो भोग विलास स्वयं ही आपके दास बनकर आपकी सेवा करेंगे। मानव जन्म बड़ी मुश्किल से प्राप्त होता है। इसे व्यर्थ ना गँवाये। हम सभी जानते है कि हम इस संसार से कुछ भी साथ लेकर नहीं जायेगे। यदि आपने यहाँ करोड़ो रुपये भी जोड़ लिए तो भी वो व्यर्थ ही हैं जब तक आप उस परमपिता को प्राप्त नहीं कर लेते। उस परमात्मा कि शरण में जो सुख है वह सुख इस संसार के किसी भी भोग विलास में नहीं है।

Shri Baglamukhi Sadhana Rahasya is the upcoming book of Gurudev Shri Yogeshwaranand Ji on Ma Baglamukhi. Only limited copies of this book are going to be published. If you want to secure your copy before all sold out please make a payment of Rs 680 into the below A/C
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Being the editor and publisher of all the articles written by Shri Yogeshwaranand Ji I am very pleased to say that we are taking a next step ahead in the field of spirituality by digitalizing all the available Sanskrit texts in the world related to secret mantras, tantras and yantras. In the first phase we will digitalize all the content provided by shri yogeshwaranand ji regarding das mahavidyas. We will not only make it available for Hindi and Sanskrit readers but also translate it into English so that whole world can get the benefits from our work. I can’t do it alone. To do the same I request all of you to help me achieve this goal.
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Jai Ma Pitambara

Baglamukhi Yantra श्री बगलामुखी यन्त्र

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Shri Baglamukhi Yantra is for power, victory and dominance over enemies.

The presiding deity is Goddess Baglamukhi who is the controller of this powerful occult Baglamukhi Yantra.

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It helps achieve success in law-suits and competitions as well as pacify quarrels to the worshipper’s advantage.
The worship of this Yantra is performed in a particular star sign and moment when there is maximum power generated by the planet Mars.
The Bagalamukhi Yantra is also effective in warding off evil persons, spirits and Yakshani.

 

Goddess Bagla helps the almighty god by punishing and controlling those negative powers that try to trespass the natural flow, She controls our speech knowledge and movement. She is capable of giving powers (Siddhis) and fulfilling all the wishes of her devotee like a ‘Kalpa-Taru’.

!!Om Hleem Baglamukhi Sarwdushtanam Wacham Mukham Padam
Stambhay Jihwa Kilay Buddhi Vinashay Hleem Om swaha!!
Bagalamukhi Maha Mantra meaning is as below:-

Oh Goddess, paralyze the speech and feet of all evil people. Pull their tongue, destroy their intellect.

 

Baglamukhi Sadhana Baglamukhi Mantra Baglamukhi Puja Vidhi By Shri Yogeshwaranand Ji

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It has been said about Ma Baglamukhi that if an aspirant meditates on her lotus feet only one time, his all the sins are removed at once, if one meditates two times his all the disasters are ruined without any delay and the person who meditates three times at her lotus feet his all the impossible tasks turn into possibility. I have never seen a moment in my life when I had to asked her for any particular desire till then I have come to her shelter. Ma Baglamukhi is the source of all Knowledge. She is both the source of delusion, and also the release from that delusion. She is the foundation and supporter of our known universe, and of all invisible universes. She is called “Stambhan-Shakti” due to Her restrictive power. She has the power to restrain every person or thing which stands against her child.

The text Mantra-Maharnav says “The mantra of the goddess Bagalamukhi has the power of the Divine weapon Brahmastra instilled in it and the goddess simply strikes terror in and paralyze the enemies of her devotees. Repetition of her mantra is enough to stop even a terrible tempest.

Mother Baglamukhi is known as the Ultimate Power, having “atomic” capabilities to destroy opposition. This cosmic power, along with its compliment Lord Eka Vaktra Maha Rudra (Mritunjaya) rules over the planet Mars, which is responsible for courage, valor and adventure. “Adventure” in this context stands for protection against evil, and especially those forces ruled by Mars  i.e. soldiers, police, and so forth. The tantrik utilizes Baglamukhi Mahashakti to prevail over litigation, overcome enemies, and achieve stability in Life. Dangerous animals, anti-social elements and even gangsters can be controlled by the proper utilization of this Mahavidya.

However, it is not fair to represent Baglamukhi (as many have done) as the goddess of black power or black magic. In fact this is only one small aspect of the complete picture. Although it is true that Baglamukhi Mahavidya is generally known for Her protective power, another important aspect of this mahavidya is that She is a granter of prosperity. She is fully capable of granting all desirable things to her devotees. Health, wealth, attraction, and the Ultimate Liberation (Salvation) are the fruit of her devotion. A devotee who performs her sadhna will never be destroyed by his enemies. Unnatural death, uncontrolled diseases, unnatural tragedies can never affect her sadhak. In practice, there exist mutually exclusive mantras for the attainment of prosperity and victory over enemies by the grace of this mahaviyda, which is called “Mandaar Vidya

Further, this Mahashakti is an aspect of “Shri kul” which is known as the left hand of Lord Vishnu. So in that sense She is like the Goddess Luxmi (the goddess of wealth and spouse of Lord Vishnu). This shakti (power) is the helper of ‘Parbrahma’(supreme power of the universe) & controller of the speech, movement and knowledge. So please don’t regard her as merely a deity of destruction, but rather understand Her as a power of ‘parbrahma’, or ‘brahmashakti’, who takes everything according to the Divine Law. She can accomplish anything, but is never unfair or unjust. If you are on the wrong path, if you are unjust or harmful to the society to which you belong, you will never achieve success in your sadhana. So first, strive to be compassionate and direct your efforts towards the good for humanity. The Power is not to be used for selfish purposes.

The field of Spirituality is very vast. It is an ocean without shores. If an aspirant is to accomplish his aim, he should first select a Guru (teacher), because it is only the Guru who can carry you on the right and easy path. But the selection of a guru is very difficult undertaking, just as for a Guru – getting a good disciple is a true boon. To have a good guru is the best blessing, but to be a good disciple is really rare. So if you want to be blessed with a good guru, strive to become a good disciple.

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